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जिंदगी भी अजीब है नवीन डेविड उर्फ़ बंटी औरतों के चक्कर जाने जा रही हैं छेड़छाड़ कक्षा में पहली बार नया साल क्यू लगा तिरसी लेखनी का क्या मतलब आसान नहीं तब से लेकर अाज तक कोहिनूर एक बार राजनीति कब से प्रकृति आख़िर कब तक आ चुका तो हवाएँ धन दौलत माया इतनी इकठ्ठे करते कभी छाँव हीरे

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